कालभैरव अष्टमी: भगवान के साथ संवाद का अद्वितीय संगम
भारतीय पौराणिक धारा के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालभैरव अष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव ने कालभैरव के रूप में अवतार लिया था, और इस पर्व को कालभैरव जयंती के रूप में मनाया जाता है।
कालभैरव जी का महत्त्व
भगवान कालभैरव को तंत्र का देवता माना गया है, और तंत्र शास्त्र के अनुसार, उनकी पूजा से ही सिद्धि की प्राप्ति होती है। कालभैरव की कृपा से भक्त निर्भय होता है और उसे अपने सभी संघर्षों से मुक्ति प्राप्त होती है।
कालभैरव के प्रसन्न करने के 13 उपाय
1. सुबह आराधना:
– उठते ही कुश पर बैठकर भगवान कालभैरव की पूजा करें और उनके मंत्र का जाप करें।
2. मंदिर यात्रा:
– शांति से भरा किसी भैरव मंदिर में जाएं और पूजा अर्चना करके प्रसाद बांटें।
3. मंत्र जाप:
– कालभैरव मंत्र का नियमित जाप करें, जो भक्त को भैरव महाराज से सुख-संपत्ति की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करता है।
4. भूत-पिशाच भगावा:
– संकट निवारण के लिए कालभैरव मंदिर में जाकर बिल्वपत्र चढ़ाएं और भूत-पिशाच भगाने के लिए मंत्र का जाप करें।
5. तिल-तेल का दीपक:
– शाम को सरसों के तेल के दीपक से समस्याओं से मुक्ति के लिए प्रार्थना करें।
6. बिल्वपत्र और रुद्राक्ष:
– 21 बिल्वपत्रों पर शिव का मंत्र लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं, और एकमुखी रुद्राक्ष भी अर्पण करें।
7. रोटी का उपाय:
– कालभैरव अष्टमी को रोटी पर तिल-तेल से रेखा खींचकर कुत्तों को खिलाएं, सिर्फ हफ्ते के तीन दिन।
8. कर्ज मुक्ति:
– कर्ज से मुक्ति के लिए सुबह उठकर भगवान शिव की पूजा करें और ऋणमुक्तेश्वराय मंत्र का जाप करें।
9. उड़द के पकौड़े:
– सवा किलो उड़द के पकौड़े बनाकर बांटें, जलेबी का भोग चढ़ाकर गरीबों को प्रसाद बांटें।
10. सरसों के तेल में बना भोजन:
– कालभैरव अष्टमी पर सरसों के तेल में पकवान बनाएं और गरीबों में बांटें।
11. सवा सौ ग्राम दान:
– सवा सौ ग्राम तिल, उड़द, रुपए, और काले कपड़े में पोटली बनाकर भैरवनाथ के मंदिर में चढ़ाएं।
12. इमरती दान:
– सुबह स्नान के बाद कालभैरव के मंदिर जाएं, इमरती बनाकर चढ़ाएं और इसे दान करें।
13. शिव अभिषेक:
– कालभैरव अष्टमी को शिव मंदिर में जाएं, भगवान शिव का जल से अभिषेक करें और काले तिल से उन्हें अर्पण करें, फिर मंदिर में ॐ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
निष्कर्ष:
कालभैरव अष्टमी पर इन उपायों का अनुसरण करके भक्ति और सेवा में रूचि बढ़ाएं, जिससे भगवान कालभैरव हमेशा प्रसन्न रहें और उनका आशीर्वाद सदैव बना रहे।