भविष्य मालिका के अनुसार सतयुग कब शुरू होगा?

Written by satyug.in

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क्या है ‘भविष्य मालिका’?

किसने लिखी थी ‘भविष्य मालिका’ 

भविष्य मलिका एक प्राचीन ओडिया पुस्तक है, जिसे पंच सखाओं नामक पांच संतों ने मिलकर लिखा था। इन पांच संतों में सबसे प्रमुख थे संत अच्युतानंद दास, जिन्हें ओडिशा के नोस्ट्रादमस के रूप में भी जाना जाता है। यह पुस्तक ताड़ के पत्तों पर लिखी गई थी और इसमें कलयुग में होने वाली घटनाओं का वर्णन है। लगभग 500 साल पहले इस पुस्तक की रचना हुई थी। इस पुस्तक में भविष्य की घटनाओं का अनुमान सार्थक और रोचक ढंग से किया गया है। इस पुस्तक को आप अब कई वेबसाइट से डाउनलोड करके पढ़ सकते हैं।

भविष्य मालिका के अनुसार सतयुग कब आरम्भ होगा?

सतयुग का आरंभ कलियुग के अंत के बाद होगा, जब विष्णु के कल्कि अवतार दुष्टों का नाश करके धर्म की स्थापना करेंगे। कलियुग का अंत होगा, जब इसके 5120 वर्ष बीत जाएंगे, जो 2038 ईसवी में होगा, यदि हम आर्यभट्ट के अनुसार कलियुग के प्रारंभ की तारीख 3102 ईसा पूर्व को मानें। लेकिन इस तारीख पर विचार करने से पहले यह जरूरी है कि अन्य स्रोतों की भी जाँच की जाए, क्योंकि वे कलियुग के प्रारंभ को अलग-अलग समय में रखते हैं।

इस दौरान, भगवान विष्णु के कल्कि अवतार का जन्म होगा। वह एक शक्तिशाली, न्यायपरायण, और धर्मात्मा योद्धा होंगे, जिनका नाम कल्कि होगा। वे एक घोड़े पर सवार होकर आएंगे और अपने शस्त्र, बाण, और तलवार के साथ दुष्टों को मारेंगे, धर्म को बचाएंगे। उनके साथ अन्य धर्मी और वीर योद्धाओं को भी लाया जाएगा, जो उनकी सहायता करेंगे।

कल्कि अवतार द्वारा दुनिया को एक नए क्रम, शासन, और नियमों के साथ व्यवस्थित किया जाएगा। वे शांति, समृद्धि, और सुख का संचार करेंगे और अपने अनुयायियों को वेद, योग, और भक्ति का उपदेश देंगे, ताकि वे आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति कर सकें। कल्कि अवतार का जीवन समाप्त होने पर वे भगवान विष्णु के पास लौट जाएंगे।

भविष्य मालिका के अनुसार सतयुग आरम्भ होने  से पूर्व संकेत और घटनाएं होंगी।

कलियुग के अंत से पहले, दुनिया में कई प्रकार की बुराईयां होंगी जो मनुष्यों के बुरे कर्मों, अनैतिकता, अन्याय, और अशांति के परिणाम होंगे। इनमें शामिल हो सकते हैं:

  1. युद्ध, हिंसा, उपद्रव, हत्या, लूट, बलात्कार, आतंकवाद, और अन्य अनैतिक क्रियाएं।
  2. बीमारियां, महामारी, अकाल, भूखमरी, दुर्भिक्ष, और अन्य शारीरिक और मानसिक कष्ट।
  3. प्राकृतिक आपदाएं जैसे भूकंप, आग, बाढ़, सूखा, चक्रवात, बर्फबारी, ज्वालामुखी, आकाशगंगा, और अन्य प्राकृतिक विपदें।
  4. धर्म की अस्तित्व कमी, वेदों का भूल, आचार्यों का अभाव, यज्ञों का समाप्त होना, देवताओं का अनदेखा करना, और अन्य आध्यात्मिक और धार्मिक अस्थिति का क्षय।
  5. सामाजिक विघटन, जाति-वर्ण-आश्रम का उल्लंघन, कुल-वंश का नाश, विवाह का अपवित्रीकरण, परिवार का विघटन, और अन्य सामाजिक और सांस्कृतिक अस्थिति का क्षीण होना।
  6. नैतिक और नैतिक पतन, जैसे कि असत्य, अन्याय, लोभ, क्रोध, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष, अज्ञान, और अन्य दुर्भावनाएं।

यह सभी घटनाएं कलियुग के अंत की निश्चित घटनाएं हो सकती हैं, जो लोगों को अपने कर्मों का परिणाम भोगने पर मजबूर करेंगी।

‘भविष्य मालिका’ एक बहुत ही महत्वपूर्ण पुस्तक है, जिसे पढ़ना आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। इस पुस्तक में आपको आने वाले समय के बारे में बहुत सी जानकारी मिल सकती है, और वह भी एक सरल भाषा में।

इस पुस्तक में विश्व के इतिहास, भूगोल, धर्म, राजनीति, सामाजिक, आर्थिक और प्राकृतिक परिवर्तनों का संपूर्ण विवरण है।

इस पुस्तक में आपको अपने जीवन के उद्देश्य, कर्म, धर्म और मोक्ष के बारे में भी बोहोत महत्वपूर्ण ज्ञान मिलता है। यह आपको अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए मार्गदर्शन कर सकती है।

इस पुस्तक को पढ़कर आप अपने आत्मा का विकास कर सकते हैं और आने वाले समय को सटीकता से देख सकते हैं। यह आपको सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी सशक्त कर सकती है, ताकि आप अपने भविष्य को सफलता से भर सकें।

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