शुक्र ग्रह के दोष के रामबाण उपाय

Written by satyug.in

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शुक्र: वैदिक ज्योतिष में सुंदरता, सौन्दर्य, और प्रेम का प्रतीक

शुक्र ग्रह, सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा और चंद्रमा के बाद सबसे चमकीला ग्रह है। इसे वैदिक ज्योतिष में शुभ ग्रह के रूप में पूजा जाता है, क्योंकि इसे प्यार, रोमांस, वैवाहिक सुख, शोहरत, कला, और सौन्दर्य का कारक माना जाता है। 

शुक्र की राशियाँ और स्वामित्व:

कुंडली में शुक्र को वृषभ और तुला राशि का स्वामी माना जाता है और इसकी उच्च राशि मीन और नीच राशि कन्या है। ज्योतिष के अनुसार, नवग्रहों में बुध और शनि इसके मित्र हैं, जबकि सूर्य और चंद्रमा शत्रु ग्रह माने जाते हैं।

शुक्र दोष के प्रकार और प्रभाव:

1. शुक्र का नीच राशि में होना:

यदि शुक्र कन्या राशि में हो, तो वह अपना शुभ फल नहीं देता है। इससे जातक को वैवाहिक जीवन में असंतोष, अनबन, और तलाक का सामना करना पड़ता है। जातक को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होने का भय रहता है। 

2. शुक्र का शत्रु ग्रहों के साथ युति या दृष्टि में होना:

यदि शुक्र सूर्य या चंद्रमा के साथ युति या दृष्टि में हो, तो वह अपना शुभ फल नहीं देता है। इससे जातक को अपने आत्मविश्वास, आकर्षण, और चारित्र्य में कमी महसूस होती है। 

3. शुक्र का राहु, केतु, या मंगल के साथ युति या दृष्टि में होना:

यदि शुक्र राहु, केतु, या मंगल के साथ युति या दृष्टि में हो, तो वह अपना शुभ फल नहीं देता है। इससे जातक को अपने विचारों, भावनाओं, और कार्यों में अस्थिरता, अनियंत्रितता, और अतिरंजितता होती है। 

4. शुक्र का दुष्ट भावों में (6, 8, 12) होना:

यदि शुक्र दुष्ट भावों में (6, 8, 12) हो, तो वह अपना शुभ फल नहीं देता है। इससे जातक को अपने जीवन में शत्रु, रोग, ऋण, दुःख, और नाश का अनुभव होता है। 

5. शुक्र का रेत्रोग्रेड होना:

यदि शुक्र कुंडली में रेत्रोग्रेड हो, तो वह अपना शुभ फल नहीं देता है। इससे जातक को अपने जीवन में अनिश्चितता, असंतोष, और अवसाद का अनुभव होता है। 

6. शुक्र का अष्टमेश होना:

यदि शुक्र कुंडली में अष्टमेश हो, तो वह अपना शुभ फल नहीं देता है। इससे जातक को अपने जीवन में अधिक कष्ट, दुर्भाग्य, और अपमान का अनुभव होता है। 

7. शुक्र का दुर्बल या विकल होना:

यदि शुक्र कुंडली में दुर्बल या विकल हो, तो वह अपना शुभ फल नहीं देता है। इससे जातक को अपने जीवन में अल्प सुख, अल्प लाभ, और अल्प सम्मान का अनुभव होता है। 

शुक्र दोष के निवारण के उपाय:

1. शुक्र की पूजा और शांति: शुक्र की महादशा या अंतर्दशा में उपायों में शुक्र की पूजा, जप, दान, और शांति करें। 

2. मंत्र जप: शुक्र के मंत्र का जप करें, जैसे कि “ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः” या “ॐ शुं शुक्राय नमः”। 

3. दान: शुक्र को प्रसन्न करने के लिए उसके प्रिय दान करें, जैसे कि गोरोचन, श्वेत चन्दन, श्वेत फूल, श्वेत वस्त्र, श्वेत मोती, श्वेत चावल, श्वेत शर्करा, घी, दूध, दही, श्वेत तिल, श्वेत अश्व, या गाय। 

4. शुक्र की शांति का पाठ: शुक्र की शांति के लिए शुक्र के अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का पाठ करें। 

5. रत्न धारण: शुक्र के रत्न या उपरत्न को धारण करें, जैसे कि दीमांड, ओपल, ज़ीरकोन, या वेनुस स्टार। इन रत्नों को शुक्रवार को शुक्ल पक्ष में शुक्र की होरा में शुद्ध करके धारण करें। 

6. अनुकूल वस्त्र और आहार: शुक्र के अनुकूल रंग, वस्त्र, आभूषण, और आहार का उपयोग करें। शुक्र के रंग हैं श्वेत, बैंगनी, गुलाबी, और हरा। 

7. देवी-देवता की आराधना: शुक्र के अनुकूल देवी-देवता की आराधना करें। शुक्र के देवी हैं लक्ष्मी, पार्वती, दुर्गा, और सरस्वती। 

8. व्रत, त्योहार, और तीर्थ का पालन: शुक्र के व्रत, त्योहार, और तीर्थ का पालन करें। शुक्र के व्रत हैं शुक्रवार का व्रत, श्री सूक्त का पाठ, और कामदेव का उपासना। 

शुक्र ग्रह का महत्व और शुक्र दोष के प्रभाव के बारे में जानकर यह स्पष्ट होता है कि शुक्र का सही स्थान रखना कितना महत्वपूर्ण है। शुक्र दोष को दूर करने के लिए उपायों का पालन करके व्यक्ति अपने जीवन को सुखमय बना सकता है और विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकता है।

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