श्री गणेश जी की आरती: देवभक्ति का संगीत

Written by satyug.in

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जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन को भोग लगे संत करें सेवा।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

अंधन को आंख देत कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

हाथ जोड़ विनती करूँ संकट हरे में।
दुःख शोक संकट भय हरे ओ मेरे।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

श्री गणेश जी की आरती जो कोई गावे।
मान वांछित फल पावे नित गणेश जी को ध्यावे।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

प्राचीन साहित्य में समय का अद्भुत संगीत, श्रद्धाभक्ति का हिम्मत और मन से भगवान की आराधना का आनंद – यह सब मिलकर हमें गणेश जी की आरती का अद्वितीय अनुभव होता है। समय तो निश्चित ही नहीं होता, लेकिन आमतौर पर इसे सुबह और शाम के समय किया जाता है, जब भक्त अपने अंतर में भगवान का संगीत महसूस करता है।

आरती की रूपरेखा: भक्ति का समर्पण

आरती के दौरान भक्त अपने दिल की गहराइयों से भगवान गणेश के सामंजस्यपूर्ण स्वरूप की आराधना करता है। वह फूल, मिठाई, दीपक, अगरबत्ती, शेंदूर और नारियल से सजीव कर देता है, जो उसकी पूर्वकृत भक्ति की गहराई को दर्शाता है। इन साधनों से भक्त अपनी श्रद्धाभक्ति को व्यक्त करता है, जैसे एक संगीतमय भजन के रूप में भगवान की प्रतिभा का आदर किया जाता है।

आरती के पश्चात: अनुभव और साझा करना

आरती के बाद, भक्त गणेश जी के प्रसाद को धन्यवाद और शुभकामनाओं के साथ बांटता है, जैसा कि संगीत के साथ जुड़ा हुआ सार्थक अनुभव को साझा करने का एक मौका होता है। इस समय में भक्त अपनी भगवान से मिले अनुभवों को दूसरों के साथ शेयर करता है, जिससे सामूहिक भक्ति और साहित्यिक समृद्धि होती है।

इस रीति-रिवाज में, आरती न केवल भगवान की आराधना का साधन है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक समर्पण है जो मानवता को एक साथ जोड़ता है। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया में भक्ति और संगीत की मिठास में लिपटे हुए, भक्त भगवान के साथ एक अद्वितीय बंधन में प्रवृत्त होता है।

Shri Ganesh Ji Ki Aarti Lyrics in English

jay ganesh jay ganesh jay ganesh deva.

maata jaakee paarvatee pita mahaadeva..

jay ganesh jay ganesh jay ganesh deva.

maata jaakee paarvatee pita mahaadeva..

ek dant dayaavant chaar bhuja dhaaree.

maathe par tilak sohe moose kee savaaree..

jay ganesh jay ganesh jay ganesh deva.

maata jaakee paarvatee pita mahaadeva..

paan chadhe phool chadhe aur chadhe meva.

ladduan ko bhog lage sant karen seva..

jay ganesh jay ganesh jay ganesh deva.

maata jaakee paarvatee pita mahaadeva..

andhan ko aankh det kodhin ko kaaya.

baanjhan ko putr det nirdhan ko maaya..

jay ganesh jay ganesh jay ganesh deva.

maata jaakee paarvatee pita mahaadeva..

haath jod vinatee karoon sankat hare mein.

duhkh shok sankat bhay hare o mere..

jay ganesh jay ganesh jay ganesh deva.

maata jaakee paarvatee pita mahaadeva..

shree ganesh jee kee aaratee jo koee gaave.

mann vaanchhit phal paave nit ganesh jee ko dhyaave.

 jay ganesh jay ganesh jay ganesh deva.

maata jaakee paarvatee pita mahaadeva..

Ganesh ji ki aarti ka mahatva anmol hai, jo bhakti bhav se har roj ki jati hai. Aarti ganesh bhagwan ki, jai ganesh jai ganesh aarti, ganesh ji maharaj ki aarti, jay ganesh jay ganesh aarti, shree ganesh ji ki aarti – ye sabhi aartiyon mein ham bhagwan ganesh ki stuti karte hain. Har shabd aur swar, ek anutha prem aur shraddha ka pratik hai, jo hamare dil se nikalta hai. Ganesh ji ki aarti hamare jivan mein shubh aur mangal ko bulati hai, hamare man ko shanti aur prem se bhar deti hai. Jay ganesh deva aarti, bhagwan ganesh ji ki aarti, jay ganesh ki aarti, ganesh ji ki aarti pdf bhi jaldi hi aapko is website par mil jayegi, ganesh maharaj ki aarti, jai ganesh ki aarti, ganesh ji ki aarti jay ganesh jay ganesh, jay ganesh jay ganesh ki aarti – ye sabhi humare is parampara ka atyant mahatva hai.

गणपति की आरतियां हमारे समाज में विशेष महत्वपूर्ण हैं, और इनमें से गणेश जी की आरती एक अद्वितीय स्थान रखती है। इस आरती का हिंदी में लिखा जाना, उसकी भावना और माहौल को अद्वितीयता प्रदान करता है। जय गणेश जय गणेश आरती के शब्द भक्तों को भगवान गणेश की पूजा में रूचि बढ़ाते हैं और इससे उनके जीवन में शुभ और समृद्धि की प्राप्ति होती है। गणपति बप्पा की आरती एक ऐसा साधन है जो हमें दिव्यता की ओर प्रवृत्ति करता है और हमें दिनचर्या में समृद्धि प्रदान करता है। इस आरती के माध्यम से हम गणेश जी के आशीर्वाद को अपने जीवन में महसूस करते हैं और उनकी कृपा से हमारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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